Tuesday, April 7, 2009

शहीदे - ऐ - आजम

शहीदे - ऐ - आजम

जरा सोचिये ???
क्या इसी दिन के लिए भगत सिंह ने भूख हड़ताल की थी .
ताकि लाखो लोग भूखे मरे .
जरा सोचिये ???
क्या यही सब दिन देखने के लिए उस युवक ने
अपनी जवानी देश पर कुर्बान की .
जरा सोचिये ???
झाक कर देखिये अपने मन में
और खोजिये जवाब
जो उन्होंने किया वो सही था
या
जो आप कर रहे है वो सही है .
जरा सोचिये ???

जय हिंद



मंजु चौधरी

6 comments:

Kishore Choudhary said...

हालाँकि गुलामी के ज़ख्म सी दिए गए हैं, होठों पर मिठास रख दिया गया है फिर भी कुछ अपूर्ण को उकेरती है आपकी बातें मैं ज्यादा कहूँगा तो सर्कार की शान में गुस्ताखी होगी !

manju dagar said...

Thanks Mr.Kishore

Manu said...

You write excellent poems but please let me know are you Manu/Manju/Manju Dagar or all... real as well as pen names.

& you seem to have a lot of angst inside you. Quite revolutionary in fact!

Manu Kant

Manu said...

I really liked the one on Bhagat Singh & on the state of the Indian media/journalists.

manju dagar said...

all is me mr.manu

Manu Kant said...

Ok Manju. Why don't you join KRITYA on facebook. & contribute your poems there.

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Manu